मम्मी ! सालभर बाद आये हैं न यहाँ पर ? हाँ, पिछली 'गरमिन' की छुट्टियों ही तो आये थे; अस्सी वर्षीया दादी, जो पैतृक मकान में अकेले रहतीं हैं, ने पहले ही बोल दिया । "हाँ घनश्याम, तुम्हारी दादी ठीक ही कहतीं हैं", घर की सफाई में तल्लीन मम्मी ने अंदर से ही जवाब दिया ।
मैंने भी अंदर जाकर देखा, कमर मकड़ी के जालों और धूल से भरा हुआ था। आलमारी की घड़ी भी बंद हो गई थी, सोचा अच्छा ही हुआ, "कुट्ट - कुट्ट" शोर करती रहती थी। वैसे भी इस उम्र में दादी को शायद समय देखने की जरुरत न पड़ती हो ।
तभी पीछे से दादी की आवाज आई -"अरे ! घन्शु, इस घड़ी को देख लेना ! शायद सैल ख़त्म हो गया है । इसकी 'टिक - टिक' से मन लगा रहता है । इसकी आवाज से घर में अकेली होने पर भी अकेलापन नहीं लगता ।"
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