Jul 29, 2016

काला केवड़ा



हरा - भरा - घना,
पेड़ केवड़े का ।
छोटा तना पत्तियों में दुबका जैसे,
परदे के पीछे शर्माता चेहरा ।। 

टहनियाँ इतनी दम्भी कहाँ -
कि हवा से हिलें भी नहीं ।
लहरें तट की ओर ,
बढ़ रहीं हैं, धीरे - धीरे ॥ 

बादलों के अँधेरे से,
और काला हो गया है केवड़ा ।
शुभ्र-श्वेत फूलों से,
लदा हुआ है, केवड़ा ॥ 

प्रकृति ने फूलों से,
पत्ती रुपी काले केशों को सजाया है ।
सफ़ेद फूलों से,
और भी, गहरा हो गया है, केवड़ा ॥ 

भ्रमर भी भ्रमित हो जायें,
जुल्फों में, मोगरे लगे हैं या है, केवड़ा ।
काजल के टीके से,
और भी, काला हो गया है, केवड़ा ॥

Jun 3, 2016

ईद-1



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जुलाई का दूसरा सप्ताह चल रहा था । सुबह से ही, लगातार बारिश हो रही थी । बाहर 'लॉन-टेनिस कोर्ट' के किनारे एक किशोर, लम्बी कैंची से घास काट रहा था । बड़ी तन्मयता के साथ दुनिया से बेखबर हो घास काटने में तल्लीन था । बारिश से भी बेखबर होने की कोशिश कर रहा था ।

मैंने अपनी बॉलकनी से ही खड़े होकर देखा कि जैसे-जैसे बारिश तेज हो जाती ; वैसे-वैसे ही वह तेजी से हाथ चलाने लगता ; शायद बारिश की धुन पर थिरक रहा था ; या शायद सर्दी से काँप रहा था । तभी खयाल आया कि, एक हफ्ते बाद ईद है, शायद ईद की खरीददारी ही करनी होगी ।

Feb 20, 2016

शो- पीस

"...हाँ, हाँ; यही चैक शर्ट. अच्छी लगेगी, इसे लोग देखते ही दुकान पर टूट पडे़ंगे. दुकान के बाहर ही लगा, बस एक बार लोगों की नज़र इस पर पड़ जाए. वैसे यह मुझे भी पसन्द है, कुछ दिन बाद शायद मैं खुद, अपने लिए ही ले लूंगा." या तो शर्ट वास्तव में अच्छी थी, या फिर अफज़ल का नई दुकान खोलने का उत्साह बोल रहा था.

उसके बाद उसने कई दिनों तक उस शर्ट की सुध नहीं ली। हालाँकि वह लोगों का ध्यान आकर्षित तो करती थी पर कीमत अधिक होने से उचित खरीददार नहीं मिल सका था।

धूल की परतें जम जाने से रंग भी बदल गया था। साथ ही शायद किसी ने तेल के चिकने हाथ कंधे से पोंछ दिए थे, जिससे कुछ धब्बे भी उभर आये थे। एक दिन जब अफजल की निगाह बाँह की उधड़ी हुई सिलाई पर पड़ गई तो उसने शर्ट को हटा देने का मन बनाया,  पर फिर कुछ नहीं किया।  शायद इसलिए कि  - "अब भी यह शर्ट दूर से ही कपडे की दुकान होना तो इंगित कर ही देती थी ।" 

Jan 18, 2016

मुश्किल


"Every day is a new day, and you'll never be able to find happiness if you don't move on"- Carrie Underwood

पूरे छः महीने से मैंने उससे बात नहीं की थी - एक शब्द भी नहीं।  और आज ही के दिन तो पिछली साल, मैं उससे मिला था।  हाँ हाँ , मुझे अच्छे से याद है कि किसी ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रख कर धीरे से पूछा था कि - "क्या आपको पता है, टेबल टेनिस कोर्ट किधर है",और मैंने कितने बेपरवाह होकर बोल दिया था कि -"मुझे पता नहीं।" 

आज सीढ़ियों पर दौड़ते समय ना जाने कहाँ से मुझे, उसका कॉरिडोर में तेज दौड़ना याद आ गया। कुछ खाली कुर्सी अब भी चर्र-चर्र करती रहती हैं। वैसे तो मुझे मुश्किल  काम पसंद हैं। पर अभी मैं संशय में हूँ कि उसे ऐसे ही याद करते रहना 'मुश्किल' है या 'मूव ऑन' ज्यादा मुश्किल है। पर मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा मन 'मूव-ऑन' को ही मुश्किल मानेगा।