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मैंने अपनी बॉलकनी से ही खड़े होकर देखा कि जैसे-जैसे बारिश तेज हो जाती ; वैसे-वैसे ही वह तेजी से हाथ चलाने लगता ; शायद बारिश की धुन पर थिरक रहा था ; या शायद सर्दी से काँप रहा था । तभी खयाल आया कि, एक हफ्ते बाद ईद है, शायद ईद की खरीददारी ही करनी होगी ।
