Mar 19, 2019

मेरे हाथ

हथेली से बाहर झांकती-
नीली शिरायें,
खूबसूरती की लांघती हैं-
सीमायें,
पीले हाथों की|
पीले हुए नहीं, हो गए हैं!

सर्दी की पपड़ियाँ,
उम्र के पड़ाव से पहले झुर्रियाँ,
यही नहीं,
महसूस सा होता-
रक्त का झीना प्रवाह
और गर्माहट,
इन निश्चेष्ट ठण्डे हाथों में|

कमज़ोर हुए तो क्या?
हाथ तो मेरे हैं !

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