Feb 15, 2019

No title

मेरा भी
मन करता है कि
खुशियों पर कविता लिखूँ|
रंगरेजां की चूनर
और
हरी चूड़ियों पर लिखूँ |

यही क्यों,
स्निग्ध-स्मिता की आँखों के लिए,
नव-यौवना की बिंदी और बातों के लिए,
नव-युवक की पहली नौकरी
और
पहली बार पिता बनने पर लिखूँ |

यही नहीं,
फे़न उगलती लहरों पर या नदी के उत्थान पर,
नीरव कलरव पर या ध्रुवीय शांति महान पर,
श्रमिक की शाम पर या पथिक की थकान पर,
योगी के अंतर्धान या धूर्त की मुस्कान पर,
साँसों के उत्थान या मदहोशी के अवसान पर,
दूध - गुड़ घी और मिष्टान्न पर !

वजह यह नहीं कि-
मैं खुश हूँ या होना चाहता हूँ!
लेकिन यह कि-
मैं खुद़ पर लिखना नहीं चाहता !


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