मुझे पता था, वह शाम को वहाँ बैठी होगी; हमेशा की तरह, हाथ में न्यूज़पेपर थामे | अभी एक हफ़्ते पहले ही तो उसने कहा था कि - "तुम कौन होते हो मुझे दिशा-निर्देशित करने वाले और अब से हम बात नहीं करेंगे |"
इस एक हफ़्ते में, मैंने कई बार उसे देखा एवं कई बार उसने भी मुझे देखा, पर मैं समझ नहीं पाया कि वे चिर-परिचित आँखे थीं या नहीं |
उसे क्या पता कि मुझ पर क्या गुजरी थी | उसे देखकर, अनदेखा करने के लिए मुझे खुद से कितना लड़ना पड़ा था | पूरे दो दिन तक 'मौन व्रत' रखा था खुद को यह दिलासा दिलाने के लिए कि मैं किसी से भी बात नहीं कर रहा हूँ, इसीलिए उस से भी बात नहीं कर रहा हूँ |
आज जब नहीं रहा गया तो, डरते - डरते उससे पूछ ही लिया -"अभी तक गुस्सा शांत नहीं हुआ ?" जवाब आया -"नहीं |" फिर क्या था, वह शुरू हो गई बताने कि, क्यों गुस्सा शांत नहीं हुआ था ; एक से बढ़कर एक कारण , कुछ सटीक तो , कुछ महज आवेश | पानी को बहते देख मुझे थोड़ी राहत मिल रही थी |
जब उसने देखा कि , उसकी 'डाँट' का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था तो उसने अपनी आवाज को और भी तेज कर लिया | एक बार मैंने सोचा कि कह दूँ कि - "हम आराम से भी बात कर सकते हैं पर फिर दूसरे ही क्षण लगा कि जितना तेज बोलेगी उतना ही अच्छा ; मैंने यह भी नहीं देखा कि मुझ पर पड़ती 'डाँट' को कोई और भी सुन रहा है या नहीं , पर जैसे ही मैंने देखा कि वो बीच-बीच में बाहर की ओर देख लेती है कि- "कहीं कोई और तो नहीं आ रहा है, यह देख मेरी हंसी छूट गई ...| वह बोलती रही और में उसकी आवाज को सुनता रहा |....
इसी बीच कुछ लोगों को आते देख, उसने आवाज धीमी कर ली और ऐसे बात करने लगी जैसे हम बरसों के परिचित हों | थोड़ी ही देर में उसने वार्तालाप ख़त्म करने का इशारा कर दिया और एक कागज़ पर कुछ लिख कर चली गई | उस पर लिखा था कि -"today's conversation has in no way normalised the situation & let the Status Quo remain as it was before this conversation."
मैं सोचता रह गया कि बिना गुस्से के " Status Quo maintain" कैसे हो पायेगा ?
इस एक हफ़्ते में, मैंने कई बार उसे देखा एवं कई बार उसने भी मुझे देखा, पर मैं समझ नहीं पाया कि वे चिर-परिचित आँखे थीं या नहीं |
उसे क्या पता कि मुझ पर क्या गुजरी थी | उसे देखकर, अनदेखा करने के लिए मुझे खुद से कितना लड़ना पड़ा था | पूरे दो दिन तक 'मौन व्रत' रखा था खुद को यह दिलासा दिलाने के लिए कि मैं किसी से भी बात नहीं कर रहा हूँ, इसीलिए उस से भी बात नहीं कर रहा हूँ |
आज जब नहीं रहा गया तो, डरते - डरते उससे पूछ ही लिया -"अभी तक गुस्सा शांत नहीं हुआ ?" जवाब आया -"नहीं |" फिर क्या था, वह शुरू हो गई बताने कि, क्यों गुस्सा शांत नहीं हुआ था ; एक से बढ़कर एक कारण , कुछ सटीक तो , कुछ महज आवेश | पानी को बहते देख मुझे थोड़ी राहत मिल रही थी |
जब उसने देखा कि , उसकी 'डाँट' का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था तो उसने अपनी आवाज को और भी तेज कर लिया | एक बार मैंने सोचा कि कह दूँ कि - "हम आराम से भी बात कर सकते हैं पर फिर दूसरे ही क्षण लगा कि जितना तेज बोलेगी उतना ही अच्छा ; मैंने यह भी नहीं देखा कि मुझ पर पड़ती 'डाँट' को कोई और भी सुन रहा है या नहीं , पर जैसे ही मैंने देखा कि वो बीच-बीच में बाहर की ओर देख लेती है कि- "कहीं कोई और तो नहीं आ रहा है, यह देख मेरी हंसी छूट गई ...| वह बोलती रही और में उसकी आवाज को सुनता रहा |....
इसी बीच कुछ लोगों को आते देख, उसने आवाज धीमी कर ली और ऐसे बात करने लगी जैसे हम बरसों के परिचित हों | थोड़ी ही देर में उसने वार्तालाप ख़त्म करने का इशारा कर दिया और एक कागज़ पर कुछ लिख कर चली गई | उस पर लिखा था कि -"today's conversation has in no way normalised the situation & let the Status Quo remain as it was before this conversation."
मैं सोचता रह गया कि बिना गुस्से के " Status Quo maintain" कैसे हो पायेगा ?
So this was the reason for "happy again" :)
ReplyDeleteNo, absolutely not Bhaiya. Before publishing this story here, I was having such fear that a wrong interpretation could be done by family members but I took the risk :)
ReplyDeletecongratulations..!! Generally, Your stories do have beautiful finishing(didnt want to write 'end')...consistency persists.
ReplyDeleteThank you, Garima ! I would really like your replies to underneath queries...
ReplyDeleteWhy did you opt, for not to use word 'end'? Do you agree that this 'ending' was not beautiful?
Because your stories leave readers with thoughts n smile...so it cant be 'end'
ReplyDeleteAapki smile mahaj smile nahi hai, ye mere liye award hain.
ReplyDeleteKeep smiling :)
Maza aa raha tera blog padh k. Its like i am re-living those times n memories- is it a work of fiction or semi-autobiography
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