आज मैंने पापा की रेल यात्रा के लिए एक टिकट 'तत्काल सेवा' से बुक करवाया । इसमें कोई नयी बात नहीं थी, क्योंकि ज्यादातर अनियोजित यात्राओं के लिए 'तत्काल' टिकट की ही आदत हो गई है और गनीमत है कि 'IRCTC' भी नवीनतम उन्नयन (up gradation) से यथोचित सेवाएं प्रदान कर रही है । यह सब तो ठीक है पर समस्या शुरू हुई पापा के 'confirmation call' से, उन्होंने कहा कि -"हाँ बेटा टिकट हो गया है , Thank you".
उन्होंने जिन 'आज्ञाओं /order' को 'taken for granted' मान रखा था आज उनको मेरे विवेकाधीन (discretionary) मान लिया है । मुझे, अपने आप से विभिन्न, एक व्यक्तिगत मुक्त इकाई (individual and separate identity) मान लिया है । एक Thank you' से उन्होंने मेरे और अपने बीच एक लकीर खींच दी है । जहाँ अभी तक उनके निर्णय मेरे सपनों की उड़ान के लिए पंख होते थे, अब मुझे लगता है कि मैंने 'चलना' भी सीख लिया है जिससे उड़ना या चलना मेरे विवेकाधीन हो गए हैं । हालाँकि सभ्य समाज में अभिवादन शब्दों को यथोस्थान, उत्तम माना गया है पर जाने क्यों ; मैं इनका 'आज' स्वागत नहीं कर पाया । इस अंतर ने आज मुझे मानने पर मजबूर कर दिया कि मैं 'बड़ा' हो गया हूँ । काश! आज उन्होंने 'Thank you' ना बोला होता तो, मैं बचपने में थोड़ा और जीता ।
उन्होंने जिन 'आज्ञाओं /order' को 'taken for granted' मान रखा था आज उनको मेरे विवेकाधीन (discretionary) मान लिया है । मुझे, अपने आप से विभिन्न, एक व्यक्तिगत मुक्त इकाई (individual and separate identity) मान लिया है । एक Thank you' से उन्होंने मेरे और अपने बीच एक लकीर खींच दी है । जहाँ अभी तक उनके निर्णय मेरे सपनों की उड़ान के लिए पंख होते थे, अब मुझे लगता है कि मैंने 'चलना' भी सीख लिया है जिससे उड़ना या चलना मेरे विवेकाधीन हो गए हैं । हालाँकि सभ्य समाज में अभिवादन शब्दों को यथोस्थान, उत्तम माना गया है पर जाने क्यों ; मैं इनका 'आज' स्वागत नहीं कर पाया । इस अंतर ने आज मुझे मानने पर मजबूर कर दिया कि मैं 'बड़ा' हो गया हूँ । काश! आज उन्होंने 'Thank you' ना बोला होता तो, मैं बचपने में थोड़ा और जीता ।
बहुत खूब..
ReplyDeletethank you, sarahana ke liye :)
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteYour writing is addictive. Write more n more often.
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